दरगाह शरीफ़ राजगढ़

श्रेणी धार्मिक

दरगाह शरीफ़ राजगढ़

हज़रत बाबा बदख़्शानी र.अ. के नाम से मशहूर बुज़ूर्ग सूफ़ी (पीरे तरीक़त) जिनका आस्ताना (दरगाह शरीफ़) शहर राजगढ़ तहसील व जिला राजगढ़ मध्यप्रदेश में स्थित है। आपका नाम ’’शाह सैयद क़ुरबान अली शाह बदख़्शानी रहमतुल्लाह अलैह’’ है। आपका जन्म बदख़्शान जो के उस समय ख़ुद मुख़्तार इस्लामी सल्तनत थी (वर्तमान अफ़गानिस्तान में) में सन 1245 हिजरी में हुआ। इसीलिए आप बदख़शानी कहलाए।

सबसे पहले आप सन 1268 हिजरी में दिल्ली तषरीफ़ लाए फिर बरेली पहुंचे। सन 1287 हिजरी में बरेली से आपको सनद ख़िलाफ़त अता की गई तथा अपने वतन बदख़्शान वापिस जाने का आदेश मिला। आप आदेश के पालन में वापिस बदख़्शान गए। वहां से हज के लिए मक्का-मदीना गए। इसबार आपको पुनः सरकारे मदीना से हुक्म मिला कि हिन्दोस्तान जाकर दीन का प्रचार करो। आदेशानुसार आप वापिस हिन्दोस्तान तशरीफ़ लाए। इसबार आपने लखनऊ में क़याम किया। लखनऊ से बरेली आए तथा कुछ दिन क़याम करके सन 1297 हिजरी में भोपाल तशरीफ़ लाए।  सन 1301 हिजरी में आप ईशवरीय आदेश से नरसिंहगढ़ तशरीफ़ लाए। नरसिंहगढ़ में जनाब मुंशी अब्दुल अज़ीज़ साहब ए.डी.सी. महाराजा नरसिंहगढ़ के यहां क़याम रहा। सन 1309 हिजरी में जनाब मुंशी अब्दुल अज़ीज़ साहब मुलाज़ेमत के सिलसिले में राजगढ़ आए तो बाबा साहब को भी अपने साथ राजगढ़ ले आए  ।

स्वर्गवास से एक दिन पहले आपने अपने लिए क़बर भी स्वयं तैयार करवाली और मुरीदों को दफ़न-कफ़न के संबंध में समझाइश दी। यह ख़बर सुनते ही शहर के लोगों का हुजूम भारी संख्या में आपके दर्शन के लिए उमड़ पड़ा। सन 1914 ईस्वी में इस्लामी माह रमज़ान मुबारक की 20 तारीख़ को आप इस दुनिया से इन्तेक़ाल फ़रमा गए।

आपकी क़बर मुबारक पर एक दस्तावेज़ के अनुसार 28 अगस्त 1915 को हुए एग्रीमेन्ट के तहतआलीशान मक़बरा तैयार किया गया। जो आज भी अपनी पूरी शानो-शोकत के साथ मौजूद है। जिसे दरगाह बाबा बदख़्शानी के नाम से जाना जाता है। बाद में दरगाह के आसपास मस्जिद, सहदरी, मेहमानख़ाना, लंगरख़ाना तथा अन्य इमारतें तामीर कराई गईं। प्रतिवर्ष 10 से 12 मार्च को दरगाह शरीफ़ पर उर्स का आयोजन किया जाता है। जिसमें देश ही नहीं बल्कि विदेशो से ज़ायरीन आते है। उर्स के दौरान पूरी रात महफ़िले समा अर्थात क़व्वालियों का कार्यक्रम आयोजित होता है जिसमें देश की मशहूर क़व्वाल पार्टियां सूफ़ियाना कलाम पैश करती हैं। साथ ही एक बड़े मेले का भी आयोजन होता है जिसमें हज़ारों की संख्या में दूकाने व मनोरंजन के साधन आते हैं। सभी धर्म तथा समाज के हज़ारों-लाखों लोग बिना किसी भेदभाव के दरगाह पर हाज़िर होते हैं तथा अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं। विगत 100 वर्षों से यह स्थान सर्वधर्म सम्भाव तथा साम्प्रदायिक सद्भाव का प्रतीक बना हुआ है।

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कैसे पहुंचें:

वायु मार्ग

राज्य मुख्यालय भोपाल से हवाई मार्ग से जुड़ा हुआ, यह राज्य की राजधानी भोपाल से 145 किमी दूर है

ट्रेन द्वारा

ब्लॉक मुख्यालय ब्यावरा से रेल द्वारा जुड़ा हुआ है, यह ब्यावरा से 24 किमी दूर है

सड़क मार्ग

राष्ट्रीय राजमार्ग 52 सड़क से जुड़ा, यह जिला मुख्यालय है